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सभी समस्याओं का मुल : बढती जनसंख्या

  सभी समस्याओं का मुल : बढती जनसंख्या

                भारत को आजाद हुए 70 वर्ष हो गए हैं | इन वर्षों में देश ने कई क्षेत्रों में आशातीत विकास किया है | परंतु विकास के साथ देश के सामने कई समस्याएं भी खड़ी हो गई है | जिनका समाधान ढूंढने में देश रक्षक सम रहा है, ऐसी ही समस्याओं में सबसे भयंकर और सबसे चिंताजनक समस्या है जनसंख्या वृद्धि की |

               हमारी सारी समस्याओं की जड़ है, जनसंख्या वृद्धि | मनुष्य को जीवन निर्वाह के के लिए केवल नहीं चाहिए बल्कि शिक्षा, रोजगार, आवास कपड़े, औषधि, पानी इत्यादि अनेक जीवन आवश्यक साधनों की आवश्यकता होती है | हमारी जनसंख्या जैसे-जैसे बढ़ती गई हमारे साधन कम पड़ गए और इस कारण हमारे सामने समस्याओं के अंबार लगते गए जिनका समाधान हमारे पास नहीं है | बेरोजगारी पानी की समस्या, वस्त्र की समस्या, आरोग्य की समस्या, घर की समस्या ऐसे अनेक समस्याएं धीरे-धीरे विकराल रूप लेती गई जिनका पूर्णत: समाधान आज भी हमारे पास नहीं है |

                आज हमारी जनसंख्या एक अरब से के ऊपर पहुंच गई है |  इस बढ़ती जनसंख्या के लिए समान रूप में हम साधन जुटाए जो असंभव है | दूसरा उपाय है जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाया जाए |

                आज देश के राजनेता देश के भविष्य से ज्यादा अपने कुर्सी और अपने पद की चिंता करते हैं | धर्मनिरपेक्षता और इसी प्रकार के अन्य बहानों को बताकर अपने चुनावी स्वार्थ के कारण देश हित में निर्णायक कदम उठाने में हिचकीचाहते हैं | उनकी इसी हिचकिचाहट ने आज देश को समस्या ग्रस्त बना दिया है | अतः पूरे देश के हित में शासकों को चाहिए कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए सार्थक प्रयास करें और कानून भी बनाए |

                  देश में उपलब्ध संसाधनों की एक सीमा है उन्हें आवश्यकता से अधिक बहाना संभव नहीं | सरकार यह मानकर चल रही है कि समाज प्रबोधन किया जाए और जनता स्वयं इस कार्यक्रम को अपनाएं विचार तो बहुत अच्छा है | परंतु स्थिति अनुकूल नहीं है, जहां निरक्षरता का प्रमाण 50 %  से ऊपर है जहां अज्ञान है, वह विचार और चिंतन कथन जैसे उपाय कारगर नहीं हो सकते हैं | पूरे देश में ऐसा कोई विचार पनपने के लिए सैकड़ों वर्ष लग जाएंगे | देहातों में और समाज के कुछ वर्गों में आज भी धर्मांधता और अंधविश्वास गहराई एक अच्छा आया हुआ है | देश हित का, विकास का कोई कार्यक्रम केवल वैचारिक स्तर पर सफल नहीं हो सकता |

                  जनसंख्या वृद्धि के खतरों को आज हम बड़े-बड़े विज्ञापन, रेडियो, टीवी, समाचार पत्रों के माध्यम से जानते हैं | वास्तव में जनसंख्या वृद्धि एक ऐसी समस्या है जिसमें पूरे देश का हित हो रहा है | अतः यह आवश्यक है कि देश का प्रत्येक नागरिक देश हित में इस समस्या से निजात पाने के हेतु चिंतन करें | सरकार को भी इस समस्या से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे |

                  70 वर्षों का इतिहास गवाह है कि देश की इस बड़ी समस्या को दूर करने के लिए देश के नेताओं ने बड़े-बड़े नारे दिए | लेकिन नारों से समस्या नहीं दूर हुई | परिवार नियोजन के लिए भी सैकड़ों नारे बनाए गए, प्रचारित किए गए पर समस्या जस की तस ही रही है | आज सरकार को चाहिए कि “एक ही बच्चा सबसे अच्छा” यह नियम को सख्ती से लागू करें | देश में घुसपैठियों की रोकथाम करें तो शायद जनसंख्या पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है |

                  बढ़ती जनसंख्या बहुत ही गंभीर समस्या है | केवल सरकार ही इससे चिंतित रहे और जनता कहे हमें क्या? ऐसी सोच उचित नहीं | देश के हर नागरिक का कर्तव्य है कि सब समस्याओं की जड़ ‘जनसंख्या वृद्धि’ की समस्या के बारे में चिंतन करें और उसे दूर करने में सरकार को सहयोग करें | क्योंकि जनसंख्या किसी धर्म, जाति या किसी प्रदेश ताल्लुकात रखने वाली समस्या नहीं है | यह समस्या सभी देश, विश्व को बाधित कर रही है | अंतः यह समस्या ऐसी एक समस्या है, जो संपूर्ण सृष्टि के लिए हानिकारक भी हो सकती है | जैसे जनसंख्या बढ़ती है वैसे ही उसके लिए पर्याप्त संसाधनों का होना भी जरूरी है | यहां उपलब्ध संसाधनों में वृद्धि नहीं हो रही है लेकिन उसे उपयोग में लाने वाले जनसंख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं | इसी प्रकार अगर हालत बनती गई तो एक दिन ऐसा भी होगा जिस दिन जन सृष्टि तो होगी लेकिन उसके लिए पर्याप्त संसाधनों का नहीं होगा | मतलब चोरी, लूटमार, गुंडागर्दी जो एक दूसरे के हिस्से का खींच लेने का जो विचार हैं यह बढ़ जाएंगे | क्योंकि हर एक अपना जीवन जीने के लिए दूसरे के पास जो संसाधन है वह लेने का प्रयास करेगा | जो संसाधनों वो लेना चाहता है उसके लिए साम-दाम -दंड- भेद कोई भी पर्याय अपना सकता है | इसी तरह जो देश या विश्व में गुन्हेगारी का माहोल बढता ही चला  जाता हैं| इसीलिए यह समस्या कोई धर्म या जाति या भावनाओं से सुलझाने वाली समस्या नहीं है, इसे अपने विवेक विचार से ही सुलझाना बेहतरीन उपाय हो सकता है |  इसीलिए आपसे विनती करता हूं कि के यह समस्या सुलझाने के लिए सरकार की मदद करें और सभी समाज संगठनों को सहायता करें क्योंकि यह समस्या सभी समस्याओं का मूल कारण है | यह समझने की कोशिश करें और विचार भी करें और विचार कर कर छोड़ना नहीं है, तो उसे आचरण में भी लाना जरूरी है |  ऐसी विनंती के साथ मैं यह कथन समाप्त करता हूं |



                यह विचार मेरे अपने विचार है | इससे हर कोई सहमत होगा यह नही | परंतु देशहित और पुरे विश्वकल्याण के लिए यह विचार करना जरुरी है, ऐसा मुझे लागता है | आप की राय कमेंट्स मे  मुझे जरूर बताए और साथ ही और कूछ प्रयास आप कर सकते हो तो यह पोस्ट जरूर शेअर करे |


  आपका स्नेही 
श्री योगेश आर. जाधव 
शिक्षक तथा लेखक

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